लोकतंत्र की ‘चौपाल’ या तानाशाही का अखाड़ा?
खोरिया में चौपाल का 'कुरुक्षेत्र': भ्रष्टाचार के आरोपों पर भिड़े प्रधान पक्ष और अधिवक्ता अधिकारियों के सामने छीना माइक: खोरिया पंचायत में विकास पर सवाल उठाना बना 'गुनाह'
अजीत मिश्रा (खोजी)
खोरिया ग्राम पंचायत में चौपाल बनी ‘जंग का मैदान’: भ्रष्टाचार के आरोपों पर भिड़े प्रधान पक्ष और अधिवक्ता
- ‘खोरिया’ चौपाल में हंगामे का वीडियो वायरल: विकास की पोल खुलने के डर से प्रधान पक्ष ने की धक्का-मुक्की
- लोकतंत्र की चौपाल या तानाशाही? खोरिया में अधिवक्ता को बोलने से रोकने पर मचा बवाल
- क्या चुनाव से पहले खोरिया में छिपे हैं भ्रष्टाचार के राज? चौपाल में हुई फजीहत से प्रधान की साख पर सवाल
बस्ती। सरकार द्वारा गांव के विकास कार्यों की समीक्षा और समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित की गई ‘चौपाल’ उस समय अराजकता का केंद्र बन गई जब खोरिया ग्राम पंचायत के प्रधान पक्ष ने एक अधिवक्ता को बोलने से रोकने के लिए हंगामा खड़ा कर दिया। यह घटना बस्ती जिले के बनकटी ब्लॉक की है, जहाँ प्रशासन की मंशा पर पानी फिरता नजर आया।
क्या था आयोजन का उद्देश्य?
शासन के निर्देश पर खोरिया में पहली बार चौपाल का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में सीडीओ, डीसी मनरेगा, डीपीआरओ, डीडीओ और बीडीओ सहित जिले के आला अधिकारियों की पूरी टीम मौजूद थी। इसका मुख्य उद्देश्य गांव के विकास कार्यों को समझना और जनता की शिकायतों का निवारण करना था। हालांकि, वहां मौजूद अधिकारियों को यह अंदाजा नहीं था कि एक सरकारी बैठक जल्द ही ‘लड़ाई का मैदान’ बन जाएगी।
घटना का आंखों देखा हाल
- चौपाल के दौरान स्थानीय विधायक प्रतिनिधि अरविंद पाल, सुरेंद्र तिवारी और रवि चंद्र पांडे सहित कई लोग मौजूद थे।
- जब अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद उपाध्याय ने माइक संभाला और पिछले पांच वर्षों में हुए कार्यों पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, तो माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
- अधिवक्ता ने अभी अपनी बात शुरू ही की थी कि प्रधान के परिवार के लोग अचानक उन पर टूट पड़े।
- प्रधान पक्ष के लोगों ने माइक छीन लिया और धक्का-मुक्की की, जिससे चौपाल अफरा-तफरी में बदल गई।
- इस पूरे हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
सरकार जब गांव की समस्याओं को सुनने के लिए अधिकारियों का अमला गांव के द्वार तक भेजती है, तो मंशा यही होती है कि आमजन अपनी बात बेबाकी से कह सकें। लेकिन बस्ती के बनकटी ब्लॉक की ग्राम पंचायत खोरिया में जो कुछ हुआ, उसने ‘चौपाल’ की अवधारणा पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
चौपाल का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद था, लेकिन खोरिया में यह संवाद ‘लड़ाई के मैदान’ में तब्दील हो गया। घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि जैसे ही अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद उपाध्याय ने गांव के कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने शुरू किए, प्रधान के परिवार ने न केवल हंगामा किया बल्कि उनके हाथ से माइक तक छीन लिया।
यह घटना किसी सामान्य विवाद की तरह नहीं देखी जा सकती। एक ऐसे सरकारी आयोजन में, जहाँ सीडीओ, डीसी मनरेगा, डीपीआरओ जैसे जिले के शीर्ष अधिकारी मौजूद हों, वहां किसी व्यक्ति को अपनी बात रखने से जबरन रोकना सीधे तौर पर लोकतंत्र के मूल अधिकारों का हनन है। यदि सब कुछ पारदर्शी और सही था, तो प्रधान पक्ष को अधिवक्ता को बोलने से रोकने की इतनी घबराहट क्यों थी?
इस हंगामे ने यह साबित कर दिया है कि खोरिया में विकास के नाम पर ‘अंधेरगर्दी’ चल रही है। जिस तरह से सवाल उठाने वाले का मुंह बंद करने का प्रयास किया गया, वह इस बात का सबूत है कि भ्रष्टाचार की परतें खुलने का डर वास्तव में मौजूद था।
क्यों हुआ हंगामा?
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच सालों में किसी ने भी गांव के कामकाज पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं की थी। ग्रामीणों के अनुसार, प्रधान परिवार को इस बात का डर सता रहा था कि अगर अधिवक्ता ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी, तो अधिकारियों और विधायक के सामने उनकी साख पूरी तरह मिट्टी में मिल जाएगी। लोगों का तर्क है कि अगर गांव में सब कुछ ठीक होता, तो चौपाल में बाधा डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
अब क्या है आगे की चुनौती?
इस घटना ने प्रधान परिवार की छवि को भारी नुकसान पहुँचाया है और इसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि चौपाल के इस विवाद को देखते हुए, चुनाव के दौरान इस गांव में सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा प्रबंध करना प्रशासन के लिए अनिवार्य होगा, ताकि मतदान निष्पक्ष हो सके। अधिकारियों के लिए भी यह एक सबक है कि उन्हें भविष्य में इस तरह की विवादित पंचायतों में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
अंततः, खोरिया की यह चौपाल एक आईना है। जनता को यह तय करना होगा कि क्या वे ऐसे ‘हीरो’ के साथ हैं जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करता है, या फिर उन ताकतों के साथ जो सच बोलने वालों की आवाज दबाना चाहती हैं।








